कैलाश विजयवर्गीय का राजनीतिक सफर | कैलाश विजयवर्गीय न्यूज़ | Kailash Vijayvargiya
श्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya)की पहचान भारतीय राजनीति के अजेय योद्धा, जनमत के दिलों को टटोलने की कला के माहिर खिलाड़ी और देश-प्रदेश के सबसे लोकप्रिय खांटी भारतीय जनसेवक के रूप में होती है। इंदौर के पिछड़े इलाके श्रमिक क्षेत्र में उनका बचपन बीता और होश संभालने के साथ वो जनसेवा से जुड़ गए। राजनीति में कदम रखते ही उनको इस बात का अहसास हो गया कि इच्छाशक्ति के बलबूते ही सपनों को साकार और जीवंत किया जा सकता है और अपने इसी दृड़ संकल्प की बदौलत उन्होंने जनसेवा के कई मुकामों को हासिल किया। इनकी शख्सियत का सबसे मजबूत पहलू जनता से आत्मीय लगाव है और इसके साथ ही कैलाशजी में अपने समर्थकों को संगठित करने और उनको प्रेरित करने की अदभुत नैसर्गिक क्षमता भी है। आध्यात्मिकता और सामाजिक मूल्यों की बुनियाद पर उन्होंने सियासत में गौरवशाली गाथा की इमारत बुलंद की। अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और समर्पण से उन्होंने राजनीति में कई कीर्तिमान रचे। कैलाशजी ने 1975 में अपना पहला सियासी कदम बढ़ाते हुए कहा था, "मैं अब भी मानता हूं कि यात्रा अभी शुरू हुई है और अभी कई मील के पत्थर हासिल करने बाकी हैं" और वाकई अपनी करीब 50 सालों की राजनीतिक यात्रा में उन्होंने कई कीर्तिमान रचे और कई मील के पत्थर हासिल किए। शहर के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के ज़रिए सकारात्मक बदलाव किए।
कैलाश विजयवर्गीय का राजनीतिक सफर
राष्ट्रनीति के मूल्यों और आदर्शों से ओतप्रोत कैलाश विजयवर्गीय के दिल में राष्ट्रसेवा के बड़े अरमान थे। उनकी आंखों में जनसेवा के ख्वाब झिलमिला रहे थे। आसमान छूती जनआकांक्षाओं और सपनों के विशाल फलक के साथ उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया। जनता के मन में गर्व और समर्पण का अहसास जगाने की काबिलियत उनमें थी। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने लोकतंत्र की असीम ऊर्जा को पा लिया और जनता उनकी नेतृत्व शख्ति की कायल हो गई। उन्होंने यह महसूस किया कि जनसेवा के लिए संकल्प और साहस जरूरी है। महान नेता सिर्फ भविष्य के सपने नहीं दिखाते, उसे सच भी करते हैं। संघ की पाठशाला से जनसेवा का पाठ सीखा और हिंदूत्व का दामन थामते हुए भगवा राजनीति की ओर कदम बड़ा दिए। 1975 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीतिक यात्रा का प्रारंभ किया। 1983 में पहली बार लोकतंत्र के महासमर में उतरे और इंदौर नगर निगम के पार्षद बने। 1990 में भाजपा हाईकमान ने उनके ऊपर भरोसा जताते हुए इंदौर-4 से विधानसभा का टिकट दिया। कैलाशजी शीर्ष नेतृत्व की उम्मीदों पर खरे उतरे और भाजपा ने यह सीट जीत ली। इसके पश्चात विजय रथ लगातार आगे बढ़ता रहा और 1993, 1998 और 2003 में इंदौर -2 से जीतकर विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2000 में इंदौर नगर निगम के पहले निर्वाचित मेयर चुने गए। 2008 में उनको मुश्किल सीट महू में केसरिया परचम लहराने की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने अपने राजनीतिक कौशल का उपयोग करते हुए महू सीट भाजपा की झोली मे डाल दी। 2013 के विधानसभा चुनाव में भी महू से जीत दर्ज की। 2023 में उनको एक बार फिर राज्य के रण में उतारा और इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक से उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार को बड़े अंतर से पटखनी देते हुए जीत दर्ज की।
कैलाश विजयवर्गीय 1990 से विधानसभा के अजेय योद्धा
- 1990 में नौवीं विधानसभा के चुनाव में
क्षेत्र क्रमांक 4 से खड़े हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी
इकबाल खान को 25,602 वोटों से हराया। उन्हें 48,413 वोट और इकबाल खान को 22,811 वोट मिले।
- 1993 में दसवीं विधानसभा के चुनाव में
क्षेत्र क्रमांक 2 से खड़े हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी
कृपाशंकर शुक्ला को 21,062 वोटों से हराया। उन्हें 59,346 वोट और कृपाशंकर शुक्ला को 38,284 वोट मिले।
- 1998 में ग्याहरवीं विधानसभा में इंदौर
क्षेत्र क्रमांक 2 से खड़े हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी
रेखा गांधी को 20,273 वोटों से हराया। उन्हें 64,409 वोट और रेखा गांधी को 44,136 वोट मिले।
- 2003 में बारहवीं विधानसभा में इंदौर
क्षेत्र क्रमांक 2 से खड़े हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी
अजय राठौर को 35,911 वोटों से हराया। उन्हें 86,175 वोट और अजय राठौर को 50,264 वोट मिले।
- 2008 में तेरहवीं विधानसभा में महू से खड़े
हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अंतर सिंह दरबार को 9,791 वोटों से हराया। उन्हें 67,192 वोट और अंतर सिंह दरबार को 57,401 वोट मिले।
- 2013 में चौदहवीं विधानसभा में महू से खड़े
हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अंतर सिंह दरबार को 12,216 वोटों से हराया। उन्हें 89,848 वोट और अंतर सिंह दरबार को 77,732 वोट मिले।
- 2023 में सोलहवीं विधानसभा में क्षेत्र
क्रमांक 1 से
खड़े हुए और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला को 57,939 वोटों से हराया। उन्हें 1,58,123 वोट और संजय शुक्ला को 1,00,184 वोट मिले।
इस प्रकार, उन्होंने विभिन्न चुनावों में कांग्रेस
के प्रत्याशियों को हराकर अपनी जीत दर्ज की।
4 अलग-अलग क्षेत्रों से रहे 7 बार विधायक
कैलाश विजयवर्गीय अब तक बिना कोई चुनाव हारे 7 बार विधानसभा के सदस्य चुने गए हैं। उन्होंने चार विधानसभा क्षेत्रो इंदौर-4, इंदौर-2, महू और इंदौर-1 से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। नई सरकार में वो एकमात्र मंत्री हैं जिन्होंने तीन मुख्यमंत्रियों सुश्री उमा भारती, श्री बाबूलाल गौर और श्री शिवराज सिंह चौहान के साथ काम किया है और अब चौथे मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में कैबिनेट मंत्री बने हैं। 2003 में सुश्री उमा भारती सरकार में उन्हें लोक निर्माण विभाग, संसदीय कार्य, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ( सिंहस्थ -कुम्भ संबंधी कार्य ) का कैबिनेट मंत्री बनाया था। 2004 में उन्हें धार्मिक न्यास, धर्मस्व और पुनर्वास विभाग भी दिया गया। अगस्त 2004 में श्री बाबूलाल गौर सरकार में जन-कार्य मंत्री के रूप में शपथ ली। दिसम्बर 2005 में श्री शिवराज सिंह ने उनको जन-कार्य, सूचना तकनीकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। 2008 में श्री शिवराज सरकार के दूसरे कार्यकाल में कैलाशजी को आईटी और उद्योग विभाग और 2013 में शिवराज सरकार के तीसरे कार्यकाल में शहरी विकास विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। दिसंबर 2023 में श्री मोहन यादव की कैबिनेट में उनको नगरीय विकास, आवास एवं संसदीय कार्य मंत्रालय का कार्य सौंपा गया। भारतीय जनता पार्टी के वे पहले नेता है, जिनको लगातार चौथी बार राष्ट्रीय महामंत्री बनाया है। कैलाश विजयवर्गीय साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए थे। 9 साल तक इस पद पर बने रहने के बाद उन्होंने दिसंबर 2023 में पद से इस्तीफा दे दिया।
विभिन्न पदों को किया सुशोभित
- 1985 में स्थायी समिति के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री बने। भारतीय जनता पार्टी इंदौर के संगठन मंत्री तथा विद्यार्थी मोर्चे के प्रदेश संयोजक रहे।
- 1992 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात के युवा मोर्चा प्रभारी बने।
- 1993 वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव और गुजरात के नेता बनाए गए।
- 2002 में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय प्रशासन मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक मनोनीत किए गए।
- 2003 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता बने।
- 1990 में नौवीं एवं 1993 में दसवीं विधान सभा के सदस्य रहते हुए सार्वजनिक उपक्रम समिति एवं लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।
कैलाश विजयवर्गीय की अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ: एक वैश्विक दृष्टिकोण
- वर्ष 2000 में अखिल भारतीय महापौर परिषद के अध्यक्ष पद से लेकर उपाध्यक्ष पद तक मनोनीत किया गया।
- वर्ष 2001 में अखिल भारतीय महापौर परिषद का अध्यक्ष चुना गया और अमेरिका के होनोलुलु में आयोजित विश्व महापौर सम्मेलन में उन्हें सर्वश्रेष्ठ महापौर का पुरस्कार दिया गया।
- वर्ष 2001 चीन में आयोजित विश्व पृथ्वी शिखर सम्मेलन की तैयारी समिति का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया गया।
- वर्ष 2002 में कैलाशजी विजयवर्गीय ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर शहरी विकास पर अपने अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए ब्रिटेन की यात्रा की।
- वर्ष 2002 में संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक्सॉस राज्य के गारलैंड शहर में शहरी विकास-2002 पर समझौते में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया।
- वर्ष 2002 में पर्यावरण सुधार और हरित जीवन के लिए किए गए समर्पित प्रयास को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने इंदौर को 'स्वच्छ शहर, हरित शहर - 2002' से सम्मानित किया गया।
- वर्ष 2003 में दक्षिण एशियाई महापौर सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया।
- वर्ष 2003 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में आयोजित विश्व पृथ्वी सम्मेलन-2003 में स्वयंसेवकों के भारतीय मोर्चे का नेतृत्व किया।
- वर्ष 2006 में सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जनमत निर्माण के लिए किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सम्मानित किया गया।
- वर्ष 2007 में मध्य प्रदेश को आईटी क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए। श्री विजयवर्गीय को प्रतिष्ठित बिल्डिंग इंडस्ट्रीज लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया।
- वर्ष 2008 में इंदौर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए और लगातार 15 साल तक अध्यक्ष रहने के बाद इस्तीफा दिया।
- वर्ष 2021 में भारत के शीर्ष 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया।
- इसके अलावा कैलाशजी नंदानगर नवयुवक रामायण मंडल के संस्थापक, रामायण मंडल संगठनों के अध्यक्ष एवं इंदौर के अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से संबद्ध रहे साथ ही लकी वाण्डरर्स स्पोर्ट्स केयर के संरक्षक रहे।
अपने सियासी सफर में कैलाश विजयवर्गीय(Kailash Vijayvargiya)ने कभी मायाजाल नहीं बुना। उन्होने जनता को यह बताया कि जनसेवा के माध्यम से उन्होंने क्या महसूस किया। कैलाशजी ने जनता को कभी आश्वासन नहीं दिया, बल्कि गलियों और सड़कों की खाक छानकर उनकी दुश्वारियों को समझा और उनकी समस्या का समाधान किया। अपने इसी विजन की बदौलत वो आम आदमी के दिल की गहराई में उतरते चले गये। उम्मीद के बीज तो सभी राजनेता बोते हैं, लेकिन इंदौरवासियों ने सदैव अपने बीच के आम आदमी पर भरोसा जताया। सकारात्मक ऊर्जा के साथ सामाजिक सदभाव और समावेशी राजनीति उनकी प्रमुख पहचान है। सत्ता की भागमभाग में इतिहास भी हमेशा वास्तविक नायकों का ही साथ देता है। इतना प्यार और सम्मान पाने के बावजूद धरती पर सहजता से चलना ही कैलाशजी को महान बनाता है।
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